Rahat Indori Best Shayari – दिल को राहत दे-दे पढ़ें ऐसे मशहूर शेर
राहत इन्दोरी का नाम सुनते ही युवा दिलों में उमंग सी भर जाती है. क्योंकि एक तो राहत साहब का शायरी बोलने का लहजा ऐसा था की लोग उसी शायरी को 10-10 बार भी सुन लेते थे. इसके अलावा Rahat Indori Shayari इतनी खूब है की उन्हें सुनकर मानों की, बुझे हुए दिल को भी सुकून मिल जाता है. एकबार किसी शो के दौरान राहत साहब से किसी ने पूछ लिया की – आप दिलजले शायर है या फिर किसी और टाइप के?
इसका जवाब राहत साहब ने बड़ी हंसी मजाक से दिया और कहा की- मेरे शरीर के रंग को देखकर आपको नही लगता क्या की मैं जला हुआ ही शायर हूँ. और दोस्तों राहत साहब के इसी हंसी मजाक वाले अंदाज के सब दीवाने थे.
इसलिए हम आपके लिए इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से राहत साहब के कुछ चुनिंदा शेर-शायरी (Rahat Indori Best Shayari) लेकर आए है जिन्हें पढ़कर आप अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करें:
राज़ जो कुछ भी हो इशारों में बता भी देना,
हाथ जब उससे मिलाना तो दबा भी देना..!
मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता,
यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी..!

रात की धड़कन जब तक जारी रहती है,
सोते नहीं हम ज़िम्मेदारी रहती है…!
तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के,
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के,
आते जाते हैं कई रंग मेरे चेहरे पर,
लोग लेते हैं मज़ा, ज़िक्र तेरा कर के..!
बीमार को मर्ज़ की दवा देनी चाहिए,
मैं पीना चाहता हूँ, पिला देनी चाहिए..!

ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे,
जो हो परदेस में वो किससे रज़ाई मांगे..!
किसने दस्तक दी ये दिल पर.. कौन है..?
आप तो अंदर है बाहर कौन है..?
अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है,
जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे..!
ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था,
मैं बच भी जाता तो एक रोज़ मरने वाला था,
मेरा नसीब.. मेरे हाथ कट गए.
वर्ना मैं तेरी मांग में सिन्दूर भरने वाला था..!

तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो,
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो..!
मैंने अपनी खुशक आँखों से लहू छलका दिया,
एक समुंदर कह रहा था मुझे पानी चाहिए..!
उसकी कथई आँखों में है जंतर-मंतर सब,
चाक़ू-वाकु छुरिया-वुरियां खंजर-वंजर सब,
जिस दिन से तुम रूठी..मुझसे रूठे-रूठे है,
चादर-वादर तकिया-वकिया बिस्तर-विस्तर सब,
मुझसे बिछड़कर वो भी कहाँ अब पहले जैसी है?
फ़ीके पड़ गए कपडे-वपड़े जेवर-वेवर सब..!
आँख में पानी रखो, होंठों पे चिंगारी रखो,
ज़िंदा रहना है तो, तरीक़े बहुत सारी रखो..!
अब तो हर हाथ का पत्थर, हमें पहचानता है,
उम्र गुज़री है तेरे शहर में, आते जाते..!

अब अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूँ,
मैं चाहता था की चरागों को आफ़ताब करूँ,
उस आदमी को बस एक धुन सवार रहती है,
बहुत हसीन है दुनिया इसे खराब करूँ..!
रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता है,
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है..!
उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो,
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है..!
न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा,
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा..!
बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर,
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ..!
आप इन Rahat Indori Best Shayari को सोशल मीडिया पर कॉपी करके या डायरेक्ट भी शेयर कर सकते है. हमने आपको हर एक शायरी को शेयर करने के लिए सभी माध्यम उपलब्ध करवा दिए है…!